अंतर्नाद

मैंने स्वयं रचा, तुम्हारा अनुभूत सत्य, तुम्हारे लिए ...

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यही इरादा है मन में

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अटल संकल्प :

यही इरादा है मन में


नए साल के पहले दिन पर, यही इरादा है मन में

मेरे किसी काम से कोई, तनिक दुखी न हो जीवन में |


खाने-पीने, सोने-जगने, देह की ये दुनियादारी

ये सब तो आपे की दुनिया, जीने की दुनिया न्यारी |


जीवन की आपा-धापी में, इधर कुआँ उधर है खाई

अंधे हो-होकर आपस में, ऐसा क्या टकराना भाई |


अच्छा सोचें, अच्छा बोलें, व्यवहार करें अच्छा-अच्छा

बेटी-बहू किसी के घर की, निर्भय चले बिना अभिरक्षा |


आशाओं की बखिया उधड़ी, विश्वास बहुत ही टूट गए

फाँसी के फंदे कसे गए, फिर भी आँसू हैं नहीं गए |


अब भी तो बेटियों की खातिर, माँ-बाप का दिल रोता है

कातिल जगता अदालत में, जज घोड़े बेच के सोता है |


भोग-भोग ही क्या चिल्लाना, त्याग-भोग की राह चलें

अपना और सभी का जीवन, सब के हित की बात करें |


काम किसी के आ जाएँ, ऐसा हो सौभाग्य हमारा

किसी का बिगड़ा काम बने, पूरे मन से वारा-न्यारा |


रिश्ते-नाते छूट न जाएँ, लेना-देना प्यार-मुहब्बत

यह दुनिया प्यार की भूखी, प्यार-पगा इतबार-मुरव्वत |


कोई नहीं पराया जग में, सब में बस उसी की रग है

सब के सुख-दुःख में जीना, एक नूर से सब जगमग है |


समय नहीं रुकने वाला है, किया-धरा ही रह जाना है

जीवन का कल किसने देखा, बचा-खुचा निपटाना है |


बेटी की शादी है करनी, बेटे का है ब्याह रचाना

ईंट-ईंट से घर बनना है, द्वारे पर है पेड़ लगाना |


कुछ बेला, कुछ गेंदे होंगे, कुछ गुलाब, मोगरा, चमेली

बेल का पौधा एक किनारे, मीठी नीम एक अलबेली  |


घर के पेड़ मुहारा साजें, पौधों का सुख-चैन नजारा

बगिया महके अहसासों की, विश्वास-भरा प्यार-हजारा |


संतलाल करुण

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24 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
January 9, 2014

रिश्ते-नाते छूट न जाएँ, लेना-देना प्यार-मुहब्बत यह दुनिया है प्यार की भूखी, प्यार पे ही इतबार-मुरव्वत | कोई नहीं पराया जग में, सब में तो बस उसी की रग है सब के सुख-दुःख में है जीना, एक ही नूर से सब जगमग है | समय नहीं रुकने वाला है, किया-धरा ही रह जाना है जीवन का क्या, कल क्या होगा, बचा-खुचा सब निपटाना है स्वागत श्री करुणजी

    Santlal Karun के द्वारा
    January 9, 2014

    आदरणीय सारस्वत जी, प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

Madan Mohan saxena के द्वारा
January 8, 2014

सुन्दर ,ढेरों हार्दिक मंगल कामनाएँ ! कभी इधर भी पधारें आभार मदन

    Santlal Karun के द्वारा
    January 9, 2014

    आदरणीय सक्सेना जी, प्रतिक्रिया के लिए हृदयपूर्वक आभार !

anilkumar के द्वारा
January 3, 2014

आदर्णीय संतलाल जी , ईश्वर से प्रार्थना है , कि आपका इरादा जन जन का इरादा बने ।  बहुत सुन्दर काव्यमय संकल्प । विशेषकर यह पंक्तियां -  रिश्ते-नाते छूट न जाएँ, लेना-देना प्यार-मुहब्बत यह दुनिया है प्यार की भूखी, प्यार पे ही इतबार-मुरव्वत | बहुत बहुत बधाई और नव वर्ष की मंगलकामनाएँ ।

    Santlal Karun के द्वारा
    January 3, 2014

    आदरणीय अनिल जी, कविता और संकल्प के मर्म की अनुभूतिपरक प्रतिक्रिया के लिए हृदयपूर्वक आभार ! पुन: नव वर्ष की मंगलकामनाएँ !

sadguruji के द्वारा
January 3, 2014

आदरणीय संतलाल करुण जी,‘अटल संकल्प ब्लॉग आमंत्रण’ में विजेता बनने पर बधाई और नववर्ष की बधाई.

    Santlal Karun के द्वारा
    January 3, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, ब्लॉग पर आने के लिए हार्दिक आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
January 2, 2014

BAHUT SUNDAR SANKLAP ……..HARDIK SHUBHKAMNAYEN

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीया शिखा जी, संकल्प की सराहना के लिए हार्दिक आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ |

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 2, 2014

मंगल कामनाओं के साथ बधाई आपको

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीय यतीन्द्र जी, ब्लॉग पर आने की लिए आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

sadguruji के द्वारा
January 2, 2014

समय नहीं रुकने वाला है, किया-धरा ही रह जाना है जीवन का क्या, कल क्या होगा, बचा-खुचा सब निपटाना है.बहुत अच्छी कविता.नववर्ष की बधाई.

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, प्रशंसात्मक उद्गार के प्रति हार्दिक आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

January 1, 2014

कोई नहीं पराया जग में, सब में तो बस उसी की रग है सब के सुख-दुःख में है जीना, एक ही नूर से सब जगमग है ………………….सुन्दर और सार्थक सन्देश देती हुई पक्तिय…………………….

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीय अलीन जी, ब्लॉग और प्रसंग की प्रशंसा के लिए हार्दिक आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

January 1, 2014

बहुत सुन्दर .नव वर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं .

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीया शालिनी जी, रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

ranjanagupta के द्वारा
January 1, 2014

दर्शन को कविता की भाषा में समेटने की कला आपने अपने भावो में समोई हैबहुत अच्छे विचार और समन्वय की भाव धारा !!साभार संतलाल जी !!!

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीया रंजना जी, प्रेरक उद्गार के प्रति हार्दिक आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

jlsingh के द्वारा
January 1, 2014

कोई नहीं पराया जग में, सब में तो बस उसी की रग है सब के सुख-दुःख में है जीना, एक ही नूर से सब जगमग है | बहुत ही सुन्दर आदरणीय श्रद्धेय श्री संतलाल जी! नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं!

    Santlal Karun के द्वारा
    January 2, 2014

    आदरणीय जवाहर जी, रचना की प्रशंसा के लिए सहृदय आभार ! नव वर्ष की मंगल कामनाएँ !

yamunapathak के द्वारा
January 1, 2014

आदरणीय सर जी आज गूगल पर भी आपका ब्लॉग संकलन देख बहुत सुन्दर है और आपकी वह कविता कस लो कलाई मेरे गाँव की तो कोई उपमा नहीं है. आपका यह संकल्प बहुत नेक है हम सब इसमें शामिल हैं …और सच कहूं अनुपम मंच के नन्हे से आँगन में मूल्यों का सारा आकाश समा सा गया है और जागरण का सूर्य उदित हो गया है….मुझे लगता है नित्य अच्छे विचारों के सागर में डुबकी लगाने से हम ना जाने कितने शंख,सीपी,मोटी रत्न नित्य अपने जीवन की झोली में भरने लगे हैं जिसकी जगमगाहट से हमारी जीवन राहें कितनी आसान और खूबसूरत होती जा रही है… साभार


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