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भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में : अमर्त्य के नाम पत्र

Posted On: 15 Jan, 2014 कविता,Special Days,Hindi Sahitya में

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भारतीय सेना दिवस के उपलक्ष्य में अमर शहीदों को श्रद्धांजलि :

अमर्त्य के नाम पत्र


हे मृत्युगायक, मृत्युनायक, मृत्यु-पथगामी समर

तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |


पाक-भारत की नियंत्रण-रेख पर छल-दंभ-नर्तन

आ छिपे घुसपैठिए चढ़ चोटियों पर बन-विवर्तन

चढ़ चले तुम चोटियों पर शत्रु था संधान साधे

गोलियों के बीच निर्भय बढ़ चले था लक्ष्य आगे

हे पार्वत योद्धा विकटतम, शत्रुहन शेखर शिखर

तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |


युद्धरत भारत का सयंम देखता था विश्व अपलक

पाक अपने सैनिको के शव से भी करता कपट

धीर विक्रम हिन्द-सैनिक अंत का सम्मान देते

गोलियों खाते उन्हीं की और उनके शव भी ढोते

हे मृत्युदाता, मृत्युभ्राता, मृत्यु-उद्गाता प्रखर

तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |


मृत्यु का क्षण है अटल वह आज आए या कि कल

कोई बचता है न उससे, उसके मुख जीवन सकल

पर मौत के विकराल मुँह पर पहुँचकर भी न डिगे

तुम कारगिल की चोटियों पर प्राण न्योछावर किए

हे वीर भारतभूमि के, तुम धन्य हो रिपु-गर्वहर

तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |


वीरता का मान कुछ है, छल–कपट का नाम कुछ है

शक्ति की ज्योतित दिशा से सूर्य का संग्राम कुछ है

कड़कती बिजली चमकती दिखती है बस एक पल

आकाश के सीने में रेखा खींच जाती है चपल

हे कारगिल के कालजेता, प्राणप्रण, मृत–प्राणधर

तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |


– संतलाल करुण, ‘अक्षर’, अंक-2003


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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 19, 2014

व्लोग शिरोमणी जी सादर अभिवादन,व्लोग अन्तरिक्ष के सुर्य,आपके  तेज की चौंध से ईस व्लोग मंची अंतरिक्ष मै कुछ भी द्रष्टिगोचर नहीं  होपा  रहा है,काव्य के भावनात्मक चितेरे हो आप,क्या होगा अन्य क्षुद्र तारों का जो किसी को नजर ही नहीं आ पायेंगे,ओम शांति शांति शांति 

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    आदरणीय हरिश्चंद्र जी, ‘जागरण जंक्शन’ के सभी सुधी रचनाकारों का हृदयपूर्वक आदर करता हूँ, मंच पर सब की उपस्थिति तथा विचारशीलता के साथ ही मेरा अस्तित्व है | ओ३म शाति: शाति: शाति: |

alkargupta1 के द्वारा
January 19, 2014

संत लाल जी , भावपूर्ण ,प्रभावी श्रेष्ठ काव्य कृति

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार !

anilkumar के द्वारा
January 19, 2014

आदरणीय संतलाल जी , आपका अत्यन्त भावपूर्ण , अत्यन्त प्रभावपूर्ण काव्यमय प्रणाम उनको जो अहिर्निश देश रक्षा में रत हैं । वह सच्च में अमर्त्य हैं ।। हे वीर भारतभूमि के, तुम धन्य हो रिपु-गर्वहर तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    तद्विषयक सन्दर्भ और कविता के मर्म की अनुभूतिपरक प्रतिक्रिया के लिए हृदयपूर्वक आभार !

vaidya surenderpal के द्वारा
January 19, 2014

मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर वाले सैनिकों को शत शत नमन। सुन्दर रचना के लिए आभार।

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    रचना की प्रशंसा और सैनिकों के बलिदान के प्रति नमन-भावना के लिए हार्दिक आभार !

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 18, 2014

अद्भुत, सादर

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    प्रतिक्रिया के लिए हृदयपूर्वक आभार !

sadguruji के द्वारा
January 18, 2014

मृत्यु का क्षण है अटल वह आज आए या कि कल कोई बचता है न उससे, उसके मुख जीवन सकल पर मौत के विकराल मुँह पर पहुँचकर भी न डिगे तुम कारगिल की चोटियों पर प्राण न्योछावर किए हे वीर भारतभूमि के, तुम धन्य हो रिपु-गर्वहर तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर, तुम हो अमर |बहुत अच्छी कविता.शहीदों को नमन.

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    कविता की सराहना और शहीदों के प्रति श्रद्धा भाव के लिए हार्दिक आभार !

meenakshi के द्वारा
January 17, 2014

आदरणीय संतलाल करुण जी , ‘अमर्त्य के नाम पत्र’ बेहद संजीदा काव्य रचना ..है . बहुत-२ शुभकामनाएं ! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    प्रतिक्रिया और रचनात्मकता की सराहना के लिए हृदयपूर्वक आभार !

jlsingh के द्वारा
January 15, 2014

नमन! उस वीरता को, धीरता को, शीरता को, आपको भी!

    Santlal Karun के द्वारा
    January 19, 2014

    आदरार्थक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !


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