अंतर्नाद

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जंगल के हर मुहाने पर

Posted On: 8 Apr, 2014 social issues,कविता,Contest में

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जंगल के हर मुहाने पर


यदि एक भेड़िया मारने पर

लाखों का इनाम घोषित हो

तब भी भेड़ें कोई भेड़िया नहीं मार सकतीं

बकरी, ख़रगोश, हिरन

सब के दाँत गोंठिल हैं

ज़्यादा-से-ज़्यादा

वे चर सकते हैं

दूब और मुलायम पत्तियाँ

या चाभ सकते हैं

फेंकी हुई घास

अधिक-से-अधिक भर सकते हैं चौकड़ी

अपने मेमनों के साथ

बबरों-गब्बरों के लिए

खाई खोदने, गाड़ा बैठने, जागने की

फ़ितरत उनमें कहाँ

उन्हें तो हर रात

मैथुन और नींद चाहिए |


आहार खोजते हुए

आहार हो जाता है

उनकी भीड़ का कुछ हिस्सा हर रोज़

लेकिन वे नहीं गिरा सकते

एक भी बाघ, एक भी चीता

अगर सोता हुआ मिल जाए तब भी

बल्कि उसके दुम के नीचे की जगह

चाट-चाटकर उसे जगा देते हैं

और जब वह उठ बैठता है

तो उसके आगे

निपोरते हैं दाँत भीड़ के ही सियार

हिलाते हैं दुम भीड़ के ही कुत्ते

जिससे रँगे हात पकड़ा जाकर भी

वह डरता नहीं

मूँछें फुलाकर गुर्राता है

कि मेरी असलियत जानने के लिए

कुतियों का इस्तेमाल क्यों किया गया |

इसके लिए जल्द-से-जल्द

गिद्धराज को पकड़ा जाए

फोड़ दी जाएँ उसकी आँखें

काट दिए जाएँ

उसके पंख, पंजे और जननांग |

गिद्धों का काम

अब तीन बंदरों से लिया जाए

जिनमें से एक की आँखों पर

दूसरे के कानों पर

तीसरे के मुँह पर

उनके अपने ही हाथों का सख्त पहरा हो |


पेड़ से गिरे हुए लकड़बग्घों की

हर बार मरहम-पट्टी करती हैं लोमड़ियाँ

ऑक्सीजन देते हैं अजगर

जल्दी भूल जाते हैं गधे

उनका काला कारनामा

पेड़ पर फिर चढ़ा देते हैं उन्हें

चूहों, चींटियों, गोरुओं के भींड़-हाथ

और कानों तक फटे खूँख़ार मुँह

पेड़ की ऊँचाई से

अपनी आसमानी भाषा बोलने हैं

कान लगाकर सुनती हैं

जंगल की जमातें

हर बार वही आप्तवचन –

कि जंगल में घास की कमी नहीं है

कि इस साल अच्छी बारिश के आसार हैं

कि अब हरियाली में

दो-से-तीन गुना तक की बढ़ोत्तरी होगी

कि जंगल का हरापन

तबाह करनेवाली नीलगायों को

मुख्यधारा में लाया जा रहा है

कि सीमा-पार से आनेवाले गैंडों से

सख्ती से निपटा जाएगा

की कहीं से चिंता की कोई बात नहीं |


भेड़ियों के प्राण उनके दाँतों में होते हैं

उनके खून लगे दाँतों में

और उनकी ताक़त भेड़ों के खून में

मोटे तौर पर एक भेड़िया

इतना चालाक होता है

कि एक करोड़ भेड़ों को मात दे सकता है

यदि किसी तरह फँसकर

एक-आध शिकार होता भी है

तो ज़मीन पर

रक्तबीज टपकाए बिना नहीं मरता

जिससे भेड़ों की करोड़ों-करोड़ की संख्या

उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती

जो कोई आगे बढ़ता है

वह उनके जबड़ों-बीच शहीद होता है |


भेड़-चाल में महज़ दिनौंधी होती है

रतजगा बिल्कुल नहीं होता

भय और फुटमत के कारण

जंगल की इससे बड़ी विडम्बना

और क्या हो सकती है

कि हर हाल में मारी जाती हैं भेड़ें

और उनके भाई-बंद

चरते हुए, सोते-सुस्ताते हुए

खोह-खड्ड में छिपे हुए

या सारे जंगल के सामने बाग़ी करार करके

और आँसू बहाया जाता है घड़ियालों द्वारा

शोक-संवेदना प्रकट करते हैं तेंदुए

श्रद्धा के फूल चढ़ाता है बड़कन्ना सिंह

जबकि अधिसंख्य भेड़-भीड़

ठगी आँखों से

हर रोज़ देखती-सुनती है

जंगल के हर मुहाने पर

धूर्तों का उठता, लहराता, स्थापित

वही भेड़िया-पताका, नारा और हाथी-दाँत |


— संतलाल करुण



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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
April 15, 2014

भेड़ियों के प्राण उनके दाँतों में होते हैं उनके खून लगे दाँतों में और उनकी ताक़त भेड़ों के खून में मोटे तौर पर एक भेड़िया इतना चालाक होता है कि एक करोड़ भेड़ों को मात दे सकता है यदि किसी तरह फँसकर एक-आध शिकार होता भी है तो ज़मीन पर रक्तबीज टपकाए बिना नहीं मरता जिससे भेड़ों की करोड़ों-करोड़ की संख्या उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाती जो कोई आगे बढ़ता है वह उनके जबड़ों-बीच शहीद होता है | स्वागत , एक जीती जागती रचना के लिए श्री संतलाल जी ! बहुत बहुत बधाई

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय सारस्वत जी, आप के प्रशंसात्मक उद्गार के प्रति हार्दिक आभार !

yamunapathak के द्वारा
April 14, 2014

आदरणीय सर जी बहुत ही प्रतीकात्मक और सत्यता से लबरेज़ पंक्तियों के लिए आभार बेस्ट ब्लोगेर के रूप में चयनित होने पर हार्दिक बधाई. साभार

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीया यमुना जी, श्लाघात्मक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार !

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
April 13, 2014

भेड़-चाल में महज़ दिनौंधी होती है रतजगा बिल्कुल नहीं होता भय और फुटमत के कारण जंगल की इससे बड़ी विडम्बना और क्या हो सकती है कि हर हाल में मारी जाती हैं भेड़ें और उनके भाई-बंद बेहद सुन्दर भाव , जगाने वाली रचना , व्यंग्य और यथार्थ का चित्रण , काश लोग जागें बेस्ट ब्लागर आफ दी वीक के लिए बधाई भ्रमर ५

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय भ्रमर जी, कविता की संवेदनात्मक अनुभूति के साथ भाव-भरी प्रतिक्रया के लिए सहृदय आभार !

abhishek shukla के द्वारा
April 13, 2014

हकीकत से लबरेज़ कविता..बधाई

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय अभिषेक जी, रचना की सराहना के लिए हार्दिक आभार !

jlsingh के द्वारा
April 11, 2014

आदरणीय संतलाल जी, सादर अभिवादन! आपने निशाना तो सटीक लगाया सर जी, आम जनता भेड़, बकरियां और कुत्ते ही हैं, शेर से सभी डरते हैं, दुम हिलाते हुए, पाला बदलते हैं , कभी इधर कभी उधर कोई ने शेर ही उनकी रक्षा कर सकता हैं ..उन्हें तो घास ही चाहिए हरी हरी … आपको ‘साप्ताहिक सम्मान’ की बधाई, बाकी तो जनता एक दिन अपने ही जनार्दन का चुनाव करती है हरी ताजी घास की आश में सादर!

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय जे.एल.सिंह जी, परख, प्रतिक्रिया और प्रशंसा के लिए हृदयपूर्वक आभार !

deepak pande के द्वारा
April 11, 2014

भगवन श्रीकृष्ण ने कहा था कलयुग में संघ में ही शक्ति hogi अर्थात कमजोर भेद को संघ में रहना होगा शायद अपने डिस्कवरी चैनल nahee देखा उसमे bhainse का झुण्ड शेरोन को भी mar deta है isiliye वह संघ में रहता है मछली चिड़िया सभी बड़े मछली या पक्षी से बचने के लिए संघ में रहते हैं इन भेद रुपी जनता को भी स्वयं अपने AAP का SANGH बनाकर चुनाव करना होगा अपने लीडर का और इस जंगल में राज करना HOGA आदरणीय करूँ जी बेस्ट ब्लॉगर KE लिए बधाई स्वीकार करें

    jlsingh के द्वारा
    April 11, 2014

    आदरणीय दीपक जी, कृष्ण को चाहिए ऐसा अर्जुन जो चतुराई से जंग जीत सके …जो जीता वही सिकंदर बाकी सब अंदर!

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय दीपक जी, रचना पढ़ने और तदात्मक प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
April 11, 2014

संतलाल jee जी अभिवादन हितोपदेशकितने सहज शब्दों मै वर्णित किया है सत्य को स्वीकार कर ही व्यवहार करना चाहिए तभी जीव सुगमता से जी सकता है बधाईओम शांति शांति शांति

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय हरिश्चंद्र जी , कविता के मर्म की अनुभूतिपरक प्रतिक्रिया के लिए हृदयपूर्वक आभार !

sadguruji के द्वारा
April 11, 2014

आदरणीय संतलाल करुण जी,सादर अभिनन्दन ! बेस्ट ब्लॉगर ऑफ़ दी वीक की बधाई.

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, आदर के लिए हार्दिक आभार !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 11, 2014

बेस्ट ब्लोगर के पद पर सुशोभित होने की हार्दिक बधाई ,आदरणीय संतलाल जी ,देश के जंगल राज में जनता की सांकेतिक स्थिति भी भेड़ से बेहतर नहीं है ,सटीक उदाहरन ,आभार .

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीया निर्मला जी, प्रतिक्रिया और रचना की प्रशंसा के लिए सहृदय आभार !

sadguruji के द्वारा
April 8, 2014

आदरणीय संतलाल करुण जी,बहुत अच्छी रचना.आपको बधाई.बहुत सही कहा है आपने-जबकि अधिसंख्य भेड़-भीड़ ठगी आँखों से हर रोज़ देखती-सुनती है जंगल के हर मुहाने पर धूर्तों का उठता, लहराता, स्थापित वही भेड़िया-पताका, नारा और हाथी-दांत

    Santlal Karun के द्वारा
    April 17, 2014

    आदरणीय सद्गुरु जी, प्रोत्साहन भरी प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार !


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